जम्मू, 09 मई 2026 :
Yuva Rajput Sabha J&K के मुख्य प्रवक्ता Vishal Singh Langeh ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha द्वारा 11 अप्रैल 2026 को शुरू किए गए ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान जम्मू-कश्मीर में बढ़ते नशे और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ एक मजबूत पहल बनकर उभरा है।
जारी बयान में लंगेह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया 100 दिवसीय अभियान युवाओं को नशे की बढ़ती समस्या से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे की लत आज समाज के सामने सबसे बड़ी सामाजिक चुनौतियों में से एक बन चुकी है और इसके कारण अपराधों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। Nasha Mukt Jammu and Kashmir Abhiyan
उन्होंने कहा,
“नशा न केवल युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करता है, बल्कि उन्हें अपराध और हिंसा की ओर भी धकेलता है। चलाया जा रहा यह अभियान एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है।”
लंगेह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवा प्रदेश का भविष्य हैं और उन्हें नशे जैसी बुराई से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में युवा, विशेषकर छात्र और बेरोजगार युवक, नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है। इससे चोरी, हिंसा, गैंग गतिविधियों और अन्य आपराधिक घटनाओं में वृद्धि होती है।

लंगेह ने आगे कहा कि यह अभियान पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी के जरिए फैलाए जा रहे नार्को-टेररिज्म का करारा जवाब है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान समर्थित तत्व युवाओं को नशे की ओर धकेलकर जम्मू-कश्मीर की सामाजिक संरचना और शांति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी और नार्को-टेररिज्म में शामिल तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। युवाओं के भविष्य और प्रदेश की शांति को सुरक्षित रखने के लिए ड्रग तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना होगा।”
लंगेह ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पुलिस की भी सराहना की और कहा कि अभियान के तहत नशा तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाज को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए लंगेह ने बताया कि चल रहे ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के दौरान अब तक 500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में 14.50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की गई हैं।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ड्रग माफिया की आर्थिक कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनके अनुसार केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अवैध संपत्तियों की जब्ती भी नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए जरूरी है।
लंगेह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और युवाओं से इस अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए ताकि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में सही जानकारी मिल सके।
“युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि नशा उनके स्वास्थ्य, करियर और परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है। शैक्षणिक संस्थानों को जागरूकता के केंद्र बनना चाहिए,” उन्होंने कहा।
लंगेह ने अभिभावकों से भी अपने बच्चों के व्यवहार और गतिविधियों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग और भावनात्मक समर्थन युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से रोक सकता है।
उन्होंने नशे की गिरफ्त में आए लोगों के पुनर्वास और काउंसलिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के शिकार युवाओं को इलाज, परामर्श और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।
लंगेह ने प्रशासन से जम्मू-कश्मीर में नशामुक्ति केंद्रों को और मजबूत करने की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“नशे के शिकार युवाओं को दंड नहीं बल्कि उपचार और मार्गदर्शन की जरूरत है। पुनर्वास के जरिए ही उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ा जा सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं में अपार प्रतिभा और क्षमता है तथा उन्हें शिक्षा, खेल, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक कार्यों की ओर प्रेरित किया जाना चाहिए।
लंगेह ने धार्मिक और सामाजिक संगठनों से भी जमीनी स्तर पर नशा विरोधी जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के प्रभावशाली लोग युवाओं को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त बनाना केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है और सभी को मिलकर इस मिशन को सफल बनाना होगा।
“जम्मू-कश्मीर का भविष्य उसके युवाओं के हाथ में है। उन्हें नशे से बचाना सामाजिक ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है,” लंगेह ने कहा।
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